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Anupama 6 October 2021 Written Update

Anupama 6 October 2021 Written Update | Anupama 6th October 2021 Today full episode Written Update

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Anupama 6 October 2021 Written Update सीरियल अनुपमा के आज के एपिसोड में आप सभी देखेंगे की वनराज अनुज से कहता है तुझे जो करना है कर अनुपमा से मतलब रखना है रख खुल्लम-खुल्ला हो कि रखना अलग बेशर्म हो के रखना है रख तभी अनुज जोर से चिल्लाता है और बलराज को चुप रहने को कहता है लेकिन वनराज कहता है मुझसे पंजे के बाद अगर दिल में कोई अरमान बाकी रह गया है तो वो भी पूरी कर लो तभी अनुज वनराज से कहता है बकवास बंद कर हम कॉलेज मैं पढ़ने वाली लड़की नहीं है इतना मत गिरो तभी बनराज अनुज से कहता है गिरने की बात तेरे मुंह से अच्छी नहीं लगती

हंसराज बनराज को रोकते हैं और गोपीचंद अनुज को रोकते हैं लेकिन एक बार फिर से बन रहा है आज अनुज से कहता है अनुज कपाड़िया तुझे शायरी करनी है कर मोहब्बत करनी है कर लेकिन एक बात ध्यान रखना अनुपमा मेरी नहीं है लेकिन ये फैमिली मेरी है और मेरी फैमिली से दूर रह अनुज कहता है इससे पहले मैं अपनी हद भूल जाऊं गेट आउट यहां से चले जाओ लेकिन वनराज कहता है हद मुझे भी पार करनी आती है

वो कहते हैं ना कि जब किसी हवन में आओ तो बिना आहुति दी जाना नहीं चाहिए तो आज मैं भी आहुति दिए बिना यहां से जाऊंगा नहीं और उसके बाद बनराज वो ऑफर लेटर और जन्माष्टमी की तस्वीर फाड़ कर हवन कुंड में डाल देता है और कहता है आज के बाद इस आदमी का रिश्ता मेरे परिवार से नहीं है आज के बाद मेरा परिवार में और यह हम सभी एक दूसरे के लिए अजनबी हैं और इतना कहकर वनराज वहां से चला जाता है

वही खड़ी अनुपमा वनराज की बातें याद करती है और रोते हुए वहां से चली जाती है और वनराज अपने घर पहुंचता तभी काव्या वनराज से कहती है तुम्हारी प्रॉब्लम क्या है हर बार तो मुझे चुप करवा देते हो लेकिन आज नहीं आज मैं बोलूंगी और तुम्हें सुनना पड़ेगा कहा था ना मैंने कि वहां पर तमाशा मत करना मत करना अमित कपाड़िया के साथ तभी मां कहती है धनराज ने कुछ नहीं किया काव्य कहती है यह आप कैसी बातें कर रही है बा यह बारूद के ढेर पर माचिस की तीली लेकर बैठा हुआ है और आप है कि इसे हटाने की बजाय वेल डन वेलडन कह रही हैं

किस बात का इतना एटीट्यूड है वी किस बात की अकड़ है अरे हम लोग हैं ही क्या अनुज कपाड़िया के सामने जो उस से लड़ रहे हैं तभी वनराज कहता है अनुष्का पारिया के नाम की माला जपना बंद करो काव्या कहती है बस यही तुम्हारी प्रॉब्लम है तुमसे बर्दाश्त नहीं होता लेकिन मैं तुम्हें एक बात बता देना चाहती हूं कि हाथ से बंधी घाट को मुंह से खुलना पड़ता है

हमारा फाइनेंसियल प्रॉब्लम सब जानते ही हैं हमारा कैफे चल नहीं रहा है और ऊपर से अनुपमा ने अनुज कपाड़िया से लोन लिया हुआ है अगर अनुष्का पर या खुन्नस में आ गया ना तो हमारा कैसे तो बंद करवाएगा ही ऊपर से हमारे पास कोई रास्ता भी नहीं छोड़ेगा

और अगर अनुज कपाड़िया कुछ ना भी करे तो हम जानते हैं कि लाइफ अनप्रिडिक्टेबल है अभी हमें वह करना पड़ता है जो हम नहीं करना चाहते हैं कहीं ऐसा ना हो जाए कि हमें आगे चलकर अनुज कपाड़िया के सामने हाथ पर जोड़ना पड़ जाए सभी अनुज काव्या से कहता है ऐसा कभी नहीं होगा काव्या तभी काव्य कहती है और अगर ऐसा हो गया तो वहीं दूसरी ओर अनुज अनुपमा को ढूंढते हुए गोदाम में आता है तभी देखते अनूपमा फूट-फूटकर रो रही होती है अनुज अनुपमा के पास बैठता है

अनुपमा कहती है सॉरी मेरे साथ की पार्टनरशिप आपकी बहुत घाटे की रही कुछ अच्छा होगा या नहीं यह तो नहीं पता लेकिन रोज रोज रोज रोज बुरा ही हो रहा है मेरी किस्मत मुझसे तो रूठी हुई है मेरे साथ तो हमेशा से यही होता है मेरी तो आदत है पर जब से आप मुझसे मिले हैं ना आपके जीवन में भी दुख और बेज्जती आ गई है सॉरी लेकिन अनुज अनुपमा को समझाने की कोशिश करता है लेकिन अनूपमा हिचक हिचक के रो रही होती है

और अनुज से कहती है मेरी वजह से आपको क्या-क्या सुनना पड़ रहा है क्या-क्या बर्दाश्त करना पड़ रहा है घटिया बातें अच्छी बातें लोगों के सामने बेज्जती और पता नहीं क्या-क्या काका को भी सबके सामने शर्मिंदा होना पड़ा मेरी वजह से यह सब सुनने के बाद अनुज अनुपमा से कहता है देखो अनुपमा दोस्त होने के नाते मैं अब कुछ कहना चाहता हूं आज एक लिमिट क्रॉस करने वाला हूं उसके लिए मैं पहले से ही सॉरी कह रहा हूं अनुपमा लेकिन अब बहुत हुआ अब नहीं मैंने अपने आप से वादा किया था कि

मैं तुम्हारे पर्सनल लाइफ में कभी इंटरफेयर नहीं करूंगा तुम्हारी पर्सनल बातों में कभी कुछ नहीं कहूंगा कभी कुछ नहीं बोलूंगा मैं क्योंकि वह तुम्हारे पर्सनल लाइफ थी लेकिन अब वह लाइव पर्सनल नहीं है पब्लिक हो चुकी है थैंक्स टू दैट बनराज शाह और अब मेरा चुप रहना बेकार होगा अनुपमा सबसे पहली बात जो तुम्हें समझ नहीं है वह यह है कि तुम्हारी किस्मत तुमसे रूठ ही नहीं है अरे तुम्हारी किस्मत मुझसे कहीं ज्यादा अच्छी है मेरे पास तो सिर्फ काका है लेकिन तुम्हारे पास तो पूरी फैमिली है

तुम्हारा ध्यान रखने के लिए इसलिए तुम कभी मत समझना कि तुम्हारे किस्मत तुमसे रूठ गई है अनुपमा सब कुछ सहना चुप रहना 1 गुण माना जाता है स्पेशली औरतों में लेकिन अनुपमा हमें कोई भी बात बर्दाश्त करने से पहले यह जरूर सोच लेना चाहिए कि वो बात बर्दाश्त करने लायक है या नहीं क्योंकि जो बात आज तुम बर्दाश्त करोगी वह कल लोगों को बताएगी कि तुम्हारे साथ वह कैसा व्यवहार करें फैमिली हो दोस्तों पति हो या फिर एक्स पति हो किसी का भी हक नहीं बनता कि वो तुम्हारी बेज्जती करें किसी के सामने भी तुमने 26 साल दी है

अपनी जिंदगी के खुद को बुलाकर वह तुम्हें आज रिस्पेक्ट नहीं कर सकते हैं तो ना करे लेकिन उनका ये हक नहीं बनता कि वो तुम्हारा इंसल्ट करें अनुपमा और मैं तुम्हें भड़का नहीं रहा हूं अनुभव मैं चाहता हूं कि तुम उस दलदल से बाहर और हर रोज वही ताने वही बेज्जती वही सब कुछ आखिर कब तक रहोगी तुम 1 दिन 10 दिन 1 साल 10 साल 20 साल और एक दिन तुम खुद अंदर से टूट जाओगी

अनुपमा अनुपमा रोते हुए कहती है तो मैं क्या करूं तभी अनुज कहता है जंग लड़ना जरूरी होता है क्योंकि हर बात का सलूशन चुप रहना नहीं होता है डिवोर्स के बाद तुम उस घर में रह रही हो बा बापूजी समर किंजल उन सब की खुशी के लिए क्या वो लोग खुश हैं और उससे भी बड़ी इंपॉर्टेंट बात कि तुम खुश हो प्यार दूरियां सह सकती है लेकिन नफरत नजदीक या नहीं सह सकती

जो तुमसे प्यार करता है वो तुमसे दूर रहकर भी समझ सकता है लेकिन जो लोग तुझे नफरत करता है वह तुम्हें कभी खुश नहीं रहने देगा तुम क्यों नहीं समझ रही हो देखो तो मेरे साथ पार्टनरशिप करूं या नहीं लेकिन मैं चाहता हूं कि तू अपनी लड़ाई खुद लड़ो मैं यहां से जा रहा हूं लेकिन तुम्हें अकेला छोड़कर नहीं तुम्हें अपने साथ छोड़कर और यह लड़ाई तुम्हें खुद अकेले ही लड़नी होगी

अनुपमा को समझाने के बाद अनुज जाता है और सीमेंट की बोरी ऊपर वनराज की बातों को याद करके उसी पर पंच मारने लगता है इधर हंसराज गोपीचंद से कहते हैं कि मेरे बेटे ने आज मुझे माफी मांगने के लायक भी नहीं छोड़ा गोपीचंद हंसराज से कहते हैं आप से कोई शिकायत नहीं है लेकिन मैं वनराज को कभी माफ नहीं कर पाऊंगा आपने तो संस्कार दिए होंगे मालिक चाहे क्यों ना अपनी जान दे दे मगर कई पेड़ ऐसे होते हैं जिसमें कभी फल नहीं आते जैसे कि आपका ये वनराज तभी अनुपमा का भाई भावेश गोपीचंद से कहता है

कि वनराज भाई की पुरानी आदतों को हमने माफ नहीं किया था भूल जरूर गए थे लेकिन आज उन्होंने किया ना ना तो उसे हम कभी माफ कर पाएंगे और ना कभी मैं भूल पाऊंगा और उसके बाद भावेश मद्रासी कहता है बापू जी आज मैंने सिर्फ आप का लिहाज रखा इसलिए चुप रहा लेकिन अगर वनराज भाई ने दोबारा ऐसा कुछ किया ना तो मुझे अनु की कसम और एक भाई का वादा है कि मुझसे बुरा कोई नहीं होगा वो तो अच्छा है

कि मैं आज यहां पर नहीं थी इतना कहकर भावेश वहां से चला जाता है और हंसराज में चले जाते हैं तभी गोपीचंद देविका से कहते हैं कि किस मिट्टी की बनी है ये अनुपमा मेरे सामने एक दिन हुआ तो मुझसे बर्दाश्त नहीं हुआ और अनुपमा की सास तू रोज सालों से ऐसा होता होगा पर वह कभी अपनी मर्यादा नहीं भूली जीत का घाव भर जाता है लेकिन जिस से दिया हुआ घाव कभी नहीं भरता अनुपमा शुरू से लेकर सारी बातें याद कर रही होती है और आज के एपिसोड का दी एंड वहीं पर हो जाता है

वही कल के एपिसोड में आप सभी देखेंगे की देविका अनुज से कहती है कि अनुपमा अपना परिवार कभी नहीं छोड़ेगी इधर अनुपमा अनुज के बराबर खड़ी होती है और अनुज से कहती है सॉरी आपको डरा दिया इसलिए लेकिन ना तो अब मैं पीछे हूं और ना ही आपसे नीचे तो आपसे बराबरी में रहकर बात करूंगी वही अनुज देविका से कहता है कि मैंने अनुपमा को उसका घर छोड़ देने के लिए कहा तो ये सब होगा कल के आने वाले एपिसोड

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